1947 molana aazaad
1947 में देश आ199ज़ाद हुआ और दो टुकड़े में बंट गया देश के साथ मुसलमान भी दो टुकड़े में बंट गए फिर दो से तीन टुकड़े हो गए जाहिर है बंटने की वजह से मुसलमान कमजोर हुए जिस का असर इतने वर्षों बाद भी महसूस किया जाता है पाकिस्तान पर कोई परेशानी आती है तो वह मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की पाकिस्तान के भविष्य के बारे में कही गई भविष्य वाणियों को याद करता है और भारतीय मुसलमानों पर कोई परेशानी आती है तो वह मोहम्मद अली जिन्ना की बातों को याद करते हैं फिर अपने अपने विचार के हिसाब से इन दोनों को बुरा या भला कहा जाता है जब हम उस समय के हालात को पढ़ते हैं तो लगता है कि इन दोनों की देश के बंटवारे को लेकर अपनी अपनी एक सोच थी जिस के तहत वह दोनों चले लेकिन यह दोनों सुपर पावर नहीं थे बहुत कुछ इन दोनों के हाथ में नहीं था मौलाना आजाद के न चाहते हुए भी देश बंट गया मुसलमानों का एक वर्ग पाकिस्तान चला गया जो मालदार व असरदार मुसलमान बचे उन्होंने आम मुसलमानों से खुद को अलग कर लिया , उन की एक सोसायटी थी एक समाज था जहां गरीब व जाहिल आम मुसलमानों के लिए कुछ नहीं था उल्मा थक कर मदरसों व खानकाहों में बंद हो गए थे उधर...