Qalam(pen)ki taaqat

खींचों न कमानो को , न तलवार निकालो जब तोप हो मुक़ाबिल में , अखबार निकालो यह अकबर इलाहाबादी का शेर है जो बिल्कुल सटीक है हर ज़माने के हथियार बदल जाते हैं कभी तीर कमान व तलवार का जमाना था फिर तोपों का दौर आया फिर मीडिया की ताक़त ने दुनिया को अपने कब्जे में ले लिया अब आर्थिक शक्ति का समय है चीन बगैर हथियार चलाए अपने टेक्नोलॉजी और व्यापार के सहारे दुनिया की सुपर पावर बन चुका है खाड़ी के छोटे-छोटे देश विश्व के बड़े बड़े देशों को झुकाने की ताकत रखते हैं आज के ज़माने में सरबुलंदी के लिए सर कटाना जरूरी नहीं है इराक़ व लीबिया ने टकराव का रास्ता चुना आज उनकी हालत हमारे सामने है और जिन देशों ने टकराव का रास्ता नहीं चुना , अपनों की गालियां व बुजदिल होने के ताने सुने, गैरों के हर दबाव को बर्दाश्त किया खामोशी से अपने काम पर लगे रहे वही आज कामयाब हैं यही बात भारतीय मुस्लमानों को भी समझने की है वह इल्म व व्यापार में मेहनत करके बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं , छोटी छोटी बातों पर जज्बाती होना सही नहीं है यह ज़रूरी नहीं है कि हमेशा जज़्बात की गुलामी में ही कामयाबी खोजी जाए जज़्बात झाग की तरह होता है जो कुछ समय बाद खत्म हो जाता है और मेहनत देरपा होती है उस का प्रभाव देर तक रहता है भारतीय मुसलमान हुनरमंद हैं इतनी बड़ी संख्या में हुनरमंद चीन के इलावा दुनिया के किसी देश के पास नहीं हैं यह एक बहुत बड़ी ताकत है लेकिन हम इस ताक़त का इस्तेमाल नहीं जानते और न कभी सोचते हैं कि इस ताक़त का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है , इस ताक़त को कैसे ज्यादा कारगर साबित किया जा सकता है हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा दीन है हमारी आइडेंटिटी व शिनाख्त है आज हमारे देश के दूसरे लोग अपनी आइडेंटिटी खोज रहे हैं अपने नाम तक का फैसला नहीं कर पा रहे हैं वहीं हमारी आइडेंटिटी बिल्कुल स्पष्ट है बस जरूरत है उसे ज़्यादा से ज़्यादा जानने की Khursheeid ahmad

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