Tahzeeb aur parda
जिस तरह आदमी का, औरत का पर्दा है। वैसे ही धर्म का भी पर्दा लाज़मी है। ये जो आप रात 3 बजे से लाउडस्पीकर पर "उठ जाओ सेहरी का वक़्त हो गया है" चिल्लाना शुरू करते हैं ना ये धर्म का अंग प्रदर्शन है। हमें किस चीज़ का प्रदर्शन करना है और किसका नहीं करना कम से कम इतना शऊर हम में होना चाहिए। एक भाई रोज़ सुबह 4 बजे मस्जिद का लाउड स्पीकर स्टार्ट करके नात पढ़ना शुरू कर देगा, ये क्या बेहूदापना है भई?? नात जैसे मुकद्दस कलाम को इस अभद्रता के साथ पेश करते हुए आपको शर्म नहीं आती?? घर घर में मोबाइल है, अलार्म है.. जो लोग फुटपाथ पर सोते हैं उनके हाथ में भी ये 5 इंच का खिलौना है जिसमें अलार्म बहुत तेज़ बजता है। फिर ज़रूरत कहाँ है लाउड स्पीकर से रोज़ 10 बार रिमाइंडर देने की?? सारी रात मुहल्ले में बच्चे गुल्ली डंडा खेलते हैं, बड़े जगते रहते हैं उसके बाद ये लाउड स्पीकर वाले भाई साहब किसे जगाते हैं?? समय के साथ अपडेट होना सीख जाइए, अपडेट नहीं होंगे तो जंक फाइल्स आपके सिस्टम को धीमा और बीमार करती जाएंगी। फिर आप कहेंगे, घरों में दीन नहीं है इसलिए सब ख़राबा हो रहा है। दीन क्या लाउड स्पीकर से घुसेड़ेंगे घरों में?? दीन को और ख़ुद को, निहायत तमीज़ के साथ पेश करने की ज़रूरत है।
by
~Abbas Pathan
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें