Qur'an meaning

कुरआन का शाब्दिक अर्थ होता है पढ़ना सूरा अल क़्यामा में है فإذا قرأناه فاتبع قرآنه जब हम पढ़ चुके तो इस पढ़ने की इत्तेबा करो यानी उसे पीछे पीछे पढ़ो कुरआन उस किताब को कहते हैं जो बार बार और ज्यादा पढ़ी जाए आज बहुत से लोग कहते हैं कि कुरआन किताबे हिदायत है जैसा कि सूरा बकरा में है इसलिए सिर्फ इस का मतलब समझना है पढ़ना नहीं है तिलावत नहीं करनी है किरात करना एक फिजूल काम है अगर आप किसी बात का मतलब नहीं समझते हैं तो उसके पढ़ने का मतलब आप बगैर समझे बड़बड़ा रहे हैं इस में कोई शक नहीं है कि कुरआन किताबे हिदायत है इस का समझना और समझ कर अमल करना ज़रूरी है पर कुरआन कुरआन है इस की तिलावत भी जरूरी है इस की किरअत भी जरूरी है इसे याद करना भी जरूरी है अगर आप को लगता है कि जरूरी नहीं है तो पहले इस किताब का नाम बदल दो जब तक यह किताब कुरआन रहेगी हम पढ़ते और तिलावत करते रहेंगे कुरआन एक मुकम्मल किताब है इस में साढ़े छह हजार से ज्यादा आयतें हैं किसी एक आयत के आधार पर सब आयते रद्द नहीं हो जाती हैं आप सब पढ़िए तो आप को समझ में आएगा अपनी जहालत या कम पढ़ा होना किसी पर न थोपें अल्लाह के रसूल सलललाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया कि कुरआन के हर शब्द पढ़ने में दस नेकी मिलती है मैं यह नहीं कहता कि ألم एक हर्फ है बल्कि अलिफ़ एक हर्फ है लाम एक हर्फ है मीम एक हर्फ है आप अल्लाह के रसूल सलललाहो अलैहे वसल्लम के इस फ़रमान को देखें क्या आप समझने की नेकी बता रहे हैं या तिलावत की कुरआन से अपने ताल्लुक को मजबूत किजिए इसे पढ़िए भी इसे याद भी किजिए इस का तर्जुमा व मतलब भी समझिए और अमल भी किजिए और याद रखिए कि हमारा रब अल्लाह है कोई यूटयूबर आलिम नहीं जो उस की हर बात मान ली जाए Ikram Ishrat

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