Nafli ebadat aur Ramazan

रमज़ान इबादतों का महीना है जितनी तौफीक मिले करते रहना चाहिए फ़र्ज़ तो ज़रूरी हैं नफिल इबादतों में भी जहां तक मुमकिन हो ज्यादा से ज्यादा अदा करने की कोशिश करनी चाहिए हम मुसलमान हर चीज़ में बहस बहुत करते हैं लेकिन याद रखिए बहस के लिए बहुत समय पड़ा है रमज़ान बहस के बजाय काम का वक्त है तरावीह आठ पढ़ें या बीस मस्जिद में पढ़ कर घर आइए फिर घर में रात के किसी पहर जाग कर अकेले में दो रकअत चार रकआत जितनी हो सके अदा किजिए , अपने को अल्लाह के सुपुर्द कर दिजिए, सजदे में जाइए तो ऐसा लगे कि आज सब कुछ मांग कर ही उठना है पड़े रहिए सजदे में रुकू में यह सोचकर कि हम अल्लाह के दरबार में हैं अगर कारोबार नौकरी की वजह से ऐसा रोज़ न हो पाए तो किसी किसी रात को ऐसा जरूर किजिए अल्लाह हमें तौफीक़ दे कि हम उसकी इबादत सही तरीके से अदा कर सकें Ikram Ishrat

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