Nabi samaaj aur raham
नबी सुधार करने के लिए आते हैं मिटाने और बर्बाद करने नहीं दुनिया में जितने नबी आएं उन का मकसद था लोगों को बुराई से अच्छाई की तरफ़ लाना , उनकी कमियों को दुरुस्त करना उनकी खराबियों की इस्लाह करना
अगर कभी उन्हें ताक़त के इस्तेमाल की जरूरत भी होती है तो उतना ही इस्तेमाल करते हैं जिस से उनका मिशन सुचारू रूप से चल सके
इसकी मिसाल हमारे नबी सललाहो अलैहे वसल्लम की जिंदगी से मिलती है उन्होंने सत्रह जंगो में भाग लिया लेकिन इन युद्धों में भी यही प्रयास होता कि न सिर्फ अपना बल्कि दुश्मन का भी कम से कम जानी नुकसान हो
फतेह मक्का की जंग में एक कमांडर जिनके पास सेना का झंडा होता था जोश में आ गए और कहा कि आज बदले का दिन है
( اليوم يوم الملحمة )
आप ने सिर्फ इतनी बात पर उन्हें जिम्मेदारी से हटा दिया और कहा कि नहीं आज रहमत का दिन है ( اليوم يوم المرحمة )
मुंह से झाग उड़ाते हुए तकरीर करने वालों की बातों में न आइए खुद से सोचिए किसी को मिटाने के लिए अल्लाह अजाब के फरिश्तों को भेजता है अगर उन्हें न भेज कर नबी को भेजा है तो मकसद भी कुछ दूसरा है और वह मकसद सुधार का है न कि बर्बाद करने व मिटाने का
Ikram Ishrat
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