Islam aur Qur'an

हम मुसलमान हैं कुरान हमारे पास अल्लाह की अमानत है 1-इसे देख कर पढ़ना यानी तिलावत भी करनी है 2-इसे याद हिफ्ज़ भी करना है 3-इस का तर्जुमा व मतलब भी जानना है 4-इस पर अमल भी करना है यह नहीं कहा जा सकता है कि इन चारों चीजों में से यह करो या यह न करो कुछ लोग तर्जुमा पढ़ने से मना करते हैं और कुछ तिलावत से रोकते हैं बल्कि कुछ लोग तिलावत का मज़ाक तक उड़ाते हैं कि कुरान इस लिए नहीं नाज़िल हुआ था कि उसे बगैर समझे पढ़ा जाए ऐसा नहीं है बल्कि कुरान से हमारा हर ताल्लुक अहम है हर संबंध महत्वपूर्ण है हर निसबत जरूरी है तिलावत छोड़ने का नतीजा यह है कि आज कुछ बड़े बड़े इस्लामी स्कालर जिन्हें हजारों लाखों लोग सोशल मीडिया पर फालो करते हैं वह कुरान ग़लत पढ़ते हैं तजवीद तो बड़ी बात है जबर ज़ेर में गलती करते हैं अगर न यकीन हो तो किसी हाफ़िज़ से पूछ सकते हैं वह बताएंगे कि ऐसे कई आलिम व स्कालर हैं जो कुरान ग़लत पढ़ते हैं कुछ इस्लामी स्कालर को अपनी कमज़ोरी पता है उन्होंने इस का हल निकाला कि अपनी तकरीरों में कुरान पढ़ते ही नहीं सीधे तर्जुमा कर देते हैं लेकिन कुछ इतने ढीठ किस्म के होते हैं जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता इस लिए तिलावत करते रहना चाहिए खास कर रमज़ान में मौका भी है और बरकत भी , साथ ही तर्जुमा व मतलब पढ़ना व समझना चाहिए Ikram Ishrat

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