Har kam apne samay par hota hai

हर काम अपने समय पर होता है """""""""'""""""'""""""""""""""""""" अल्लाह के रसूल सलललाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया था कि " तुम कुस्तुनतुनिया ज़रूर फतह करोगे , वह सेना कितनी अच्छी सेना होगी उसका अमीर कितना अच्छा अमीर होगा " यह साफ बशारत थी , ऐसी खुशखबरी थी कि हर एक की ख्वाहिश थी कि काश वह कुस्तुनतुनिया फतह करने वाली सेना में शामिल होता और हुआ भी यही हज़रत मोआविया के जमाने में जब कुस्तुनतुनिया पर दो बार हमला किया गया तो हर एक अपने को इस सेना में शामिल करने के लिए आतुर हो गया मेज़बान ए रसूल हज़रत अबू अय्यूब अंसारी बूढ़े हो चुके थे लेकिन वह भी खुद को रोक न सके सेना मे शामिल हुए और उनका वही कुस्तुनतुनिया में इंतकाल हो गया लेकिन 700 वर्षों तक कुस्तुनतुनिया फतह न हो सका ऐसा नहीं कि इस बीच मुसलमान कमज़ोर थे एक से एक शानदार हुकुमतें क़ायम थीं यह भी नहीं कि कुस्तुनतुनिया दूर था उसके चारों तरफ़ मुसलमानों की सलतनतें थीं साइप्रस व सिस्ली तक में मुसलमान हुक्मरान थे सुल्तान सलाहुद्दीन अययूबी , जाहिर बेबरस बायजीद यलदर्म जैसे शानदार योद्धा उस इलाके में हुए , खिलाफते फातमी के सबसे शानदार सेनाध्यक्ष जौहर सिकली जिन्होंने काहिरा शहर आबाद किया था जामिया अज़हर बनाया था उनका जन्म स्थान भी कुस्तुनतुनिया से करीब था लेकिन कुस्तुनतुनिया फतह न हो सका क्योंकि कुस्तुनतुनिया फतह करना उस इंसान की किस्मत में था जो मात्र 21-22 साल का नौजवान था जिसे जंग से ज्यादा पढ़ाई पसंद थी जो तलवारों से अधिक किताबों में दिलचस्पी लेता था जिसे कमजोर शासक समझ कर खुद उसके वालिद ने कुर्सी से उतार दिया था और पांच साल बाद वालिद के इंतेकाल के हो जाने पर दोबारा शासक बन सका था वह नौजवान थे मोहम्मद बिन मुराद फातेहे कुस्तुनतुनिया कुस्तुनतुनिया फतह की कहानी से साफ पता चलता है कि चीज़ें अपने समय पर होती हैं वक्त से पहले कुछ नहीं मिलता अगर कोई चीज़ नहीं मिल रही है तो यह आप की कमज़ोरी नहीं है बल्कि अल्लाह की मसलेहत है यही चीज़ हम भारतीय मुसलमानों को समझने की है ज़रा जरा सी बात पर परेशान होने , रोने गिड़गिड़ाने , एक दूसरे पर आरोप लगाने और हिम्मत हारने की जरूरत नहीं है ख़ुद को मजबूत करें सकारात्मक रहें अपने अख्लाक की हिफाज़त करें अपने मर्यादाओं को न लांघें अल्लाह से दुआ करते रहें कामयाबी इंशाल्लाह आज नहीं तो कल मिलेगी Khursheeid Ahmad

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