Elaan e nubuwat

नबी करीम सललाहो अलैहे वसल्लम नबुव्वत के ऐलान के बाद 23 साल दुनिया में रहे इन में 13 साल मक्का में और 10 साल मदीना में इन 23 सालों में कुरआन नाजिल हुआ जिस में 114 सूरतें हैं इन 114 में 29 सूरतें मदीना में नाज़िल हुईं और बाकी 85 सूरतें मक्का में नाज़िल हुईं कुरान हमारी हिदायत के लिए आया है और नबी करीम सललाहो अलैहे वसल्लम हमारे लिए रोल मॉडल हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या रसूलुल्लाह की पूरी जिंदगी रोल मॉडल है या सिर्फ मदीना की जिंदगी क्या पूरा कुरान हमारी हिदायत के लिए है या मदीना वाली 29 सूरतें और बाकी मक्का वाली 85 सूरतें सिर्फ पढ़ने समझने और तिलावत के लिए है उन पर अमल करना नहीं है अल्लाह ने अपने नबी को 13 साल मक्का में क्यों रखा ? तुरंत या तीन चार साल बाद हिजरत का हुक्म क्यों नहीं दिया ? इन सवालों को पढ़ कर कोई भी कहेगा कि यह कैसे बेवकूफी वाले सवाल हैं लेकिन अफसोस यह सवाल हमारी जिंदगी हमारे अमल और हमारी बातों से उभर कर सामने आते हैं हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जिन का बस चलता तो वह अल्लाह के रसूल सलललाहो अलैहे वसल्लम को गारे हिरा से सीधे गज़वा बदर में पहुंचा देते मेरे भाई इस्लाम जिंदगी गुजारने का तरीका है कोई एक्शन मूवी नहीं है इस्लाम को समझने के लिए थोड़ी तो मेहनत किजिए अगर अल्लाह ने यूट्यूब वीडियो वाले उल्मा की तकरीर सुनने के लिए कान दिए हैं तो समझने के लिए दिमाग भी दिया है उस का इस्तेमाल जरूरी है Khursheeid ahmad

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