Abbas pathan
नहीं नहीं.. पूरा ही पशु होता है पुरुष तो.. वो भी वहशी, जंगली, दरिंदा.. इनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट, लाइसेंस सब कैंसिल कर दो.. पशुओं के कब आधार कार्ड होते हैं भई मोदी जी?? सारे पुरुषों को जंगल में ले जाकर छोड़ दो। ना ना... जंगल में नहीं.. जंगल में भी ये जानवरो को चैन से नहीं रहने देंगे, इन्हें ज्वालामुखी के अंदर डालकर ऊपर से ढक्कन बन्द कर दो। धरती पर सिर्फ स्त्रियों को ही रहने दो, ये खीं-खीं खां-खां करेंगी, इठलाएगी इतराऐगी, इतना आहिस्ता चलेगी कि सड़क पर भी खरोंच नहीं आएगी। मानव विकास अपने चरम पर पहुँच जाएगा। इन्ही को दे दो सारी दुनिया... सुबह सुबह दिमाग़ का दही कर दिया मुंशी प्रेमचंद ने..
Ikram Ishrat
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें