Hazrat moosa a.s.aur unki qaum

" मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि अल्लाह से मदद मांगो और सब्र करो , बेशक ज़मीन अल्लाह की है अपने बंदों में से जिसे चाहता है इस का वारिस बनाता है और ( अच्छा ) अंजाम तक़वा वालों के लिए है " ( कुरान ) पूंजीपतियों ने मूंह से नहीं कहा पर इस ज़मीन को अकेला अपना मान कर हर जायज़ व नाजायज़ तरीके से इस का दोहन किया कम्युनिस्टों ने जमीन को मजदूरों की माना और इस का मालिकाना हक सरकार को दे दिया सरकार ने मालिकाना हक़ पा कर हर तरह से ज़ुल्म किया लोगों को उजाड़ दिया रातों रात उन्हें एक जगह से उठा कर दूसरी जगह ले जा कर पटक दिया सोवियत संघ के समय जोज़फ स्टालिन वगैरह ने जो किया उसे सुन कर रूह कांप जाती है नबियों ने कहा कि जमीन अल्लाह की है और अल्लाह जिसे चाहता है इस का मालिक बनाता है वह ज़ुल्म नहीं करता पर ज़ुल्म को बर्दाश्त भी नहीं करता जालिमों को ढील ज़रूर देता है पर जब ज़ुल्म ज्यादा होता है तो जमीन को पलट भी देता है कभी ज़लज़ला कभी सैलाब कभी सूखा कभी बेवकत की बारिश यह सब इंसानों के अपने कामों के फल हैं इस ज़मीन पलटने और दूसरी मुसीबतों का शिकार वह लोग भी होते हैं जो अच्छे हैं तक़वा वाले हैं लेकिन उन का अंजाम अच्छा ही होगा क्योंकि अभी इस के बाद भी एक दुनिया है हमें हर हाल में सकारात्मक रहना है अल्लाह से मदद मांगनी है सब्र करना है न घबराना है और न ही किसी पर मुसीबत आने से खुश होना है अपने कामों का जायज़ा लेना है अल्लाह हमें तक़वा वाले लोगों में शामिल फरमा आमीन Khursheeid ahmad

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